टुरिज्म बोर्ड के बनने वाले सेवा केंद्र पर लगे सवालिया निशान
शैलेंद्र आर्य
बैतूल। नागपुर -भोपाल फोरलेन पर बैतूल में कोसमी डैम के पास एमपी टूरिज्म बोर्ड सेवा केंद्र बना रहा है। सेवा केंद्र के लिए राजस्व विभाग ने 5 एकड़ भूमि एमपी टूरिज्म बोर्ड को ट्रांसफर कर दी है जिसे बोर्ड ने 30 साल की लीज पर दे दी है। अब ठेकेदार डैम के पास की पहाड़ वाली भूमि को समतल बनाने के लिए उसे काट रहा है जिससे 1973 में बने कोसमी डेम पर खतरा मंडराने लगा है।जानकारों का कहना है की पहाड़ी काटने से कोसमी डेम को भारी क्षति पहुंच सकती है। पहाड़ी काटने से निकल रही मिट्टी पत्थर मुरम नीचे गिर रही है। हालांकि संबंधितो द्वारा पहाड़ी काटने की बाकायदा परमिशन ली गई है। अब सवाल यह है कि राजस्व विभाग ने एमपी टूरिज्म बोर्ड को जमीन देने के पहले जल संसाधन विभाग जिसके तहत कोसमी डेम आता है से कोई तकनीकि राय ली थी या नहीं। वही ठेकेदार को जब लीज मिली और उसने राजस्व एवं खनिज विभाग से पहाड़ी काटने की परमिशन मांगी तब भी क्या इन विभागों ने जल संसाधन विभाग से कोई सहमति या तकनीकी पक्ष की जानकारी ली थी। जैसी की जानकारी मिली है कि जल संसाधन विभाग द्वारा किसी तरह की कोई अनापत्ति नहीं दी गई है। सवाल यह भी है कि डेम से सटी पहाड़ी पर सेवा केंद्र स्वीकृत हो गया और पहाड़ी भी काटी जाने लगी तब भी जल संसाधन विभाग के जिम्मेदार लोगों ने एक्शन क्यों नहीं लिया। वहीं सूत्रों का कहना है कि टूरिज्म बोर्ड ने जिनको 30 साल की लीज सेवा केंद्र बनाने के लिए दी है उनमें एक सत्तारूढ़ भाजपा का एक प्रमुख पदाधिकारी भी है जिसकी संगठन में ऊंची पहुंच बताई जाती है। कहीं सत्ता से जुड़े इस नेता को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने के लिए ही तो नहीं नियमों को ताक पर नहीं रखा गया है। वहीं जानकार कह रहे हैं कि अगर पहाड़ी इसी तरह काटी जाती रही तो कोसमी डेम भी क्षतिग्रस्त होगा इसमें कोई संशय नहीं है।
