MP में विधानसभा की हारी सीटें जीतने के लिए भाजपा ने बनाई ‘क्लस्टर-रणनीति’

0
orig_origorig691616973891-11688513173_1692397506

MP में विधानसभा की हारी सीटें जीतने के लिए भाजपा ने बनाई ‘क्लस्टर-रणनीति’
मध्य प्रदेश में 2028 में संभावित विधानसभा चुनाव में भाजपा उन सीटों को भी जीतने के लिए विशेष रणनीति बना रही है, जिन पर जनसंघ के समय से लेकर अब तक वह कम ही जीती है। ऐसी कई सीटों को चिह्नित कर उसने न सिर्फ संगठनात्मक गतिविधियों को अभी से बढ़ा दिया है बल्कि तीन-चार गांवों का कलस्टर बनाकर उनकी जिम्मेदारी दिग्गज नेताओं को दी है।

उन्हें हार के कारणों का अध्ययन करने और उन्हें दूर करने के लिए मजबूत रणनीति बनाने को कहा गया है। ऐसी कई सीटों पर कांग्रेस अपने जिन दिग्गज नेताओं के प्रभाव के कारण मजबूत है, उनका किला भी भेदने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। ऐसी सीटों में खरगोन जिले की अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित भगवानपुरा सीट पर कांग्रेस या निर्दलीयों का दबदबा रहा है। धार जिले की कुक्षी सीट भी परंपरागत रूप से कांग्रेस के पक्ष में रही है। खरगोन जिले की अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित भीकनगांव सीट पर भी भाजपा को कभी सफलता नहीं मिली। सीधी जिले की चुरहट सीट भी कांग्रेस का गढ़ रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की इस परंपरागत सीट पर वर्ष 1993 और 2018 को छोड़कर कभी भी भाजपा नहीं जीती। एक बार 1967 में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी भी जीती। मुस्लिम बहुल भोपाल उत्तर सीट पर भाजपा सिर्फ 1993 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद के राजनीतिक माहौल में मतों के ध्रुवीकरण के लाभ के चलते जीती। 2018 में फातिमा रसूल सिद्दीकी के रूप में प्रदेश में एकमात्र मुस्लिम उम्मीदवार को उतारकर भी भाजपा सफल न हो सकी। छिंदवाड़ा जिले की चौरई सीट लंबे समय से कांग्रेस, विशेषकर कमल नाथ परिवार के प्रभाव क्षेत्र में रही है।

भाजपा के रमेश दुबे यहां के प्रभावशाली नेता रहे हैं, जिन्होंने 2003 और 2013 के विधानसभा चुनावों में यहां से जीत दर्ज की थी। इस जिले की अमरवाड़ा सीट को छोड़कर बाकी सारी सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। अमरवाड़ा सीट पर जुलाई 2024 में हुए उपचुनाव में भाजपा के कमलेश प्रताप शाह ने जीत हासिल की। यह जीत भाजपा के लिए इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि अमरवाड़ा में भाजपा 16 साल बाद वापसी करने में सफल रही। बालाघाट जिले की परसवाड़ा सीट भी ऐसी ही है, जहां से केवल दो बार भाजपा जीती।

यह रहेगी रणनीति
भाजपा ने इन कठिन सीटों के लिए मिशन-2028 के तहत एक बहुआयामी माइक्रो-प्लानिंग रणनीति तैयार की है। क्लस्टर विकास योजना बनाकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों जैसे भगवानपुरा, भीकनगांव के लिए तीन-चार गांवों का क्लस्टर बनाकर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने के लिए पार्टी का लक्ष्य प्रत्येक बूथ पर 51 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करना है। इसके लिए ‘पन्ना प्रमुखों’ को सक्रिय कर घर-घर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *