ममता नही, सिस्टम डूब गया
“ममता नही, सिस्टम डूब गया”
बरगी डैम हादसे ने खोली लापरवाही की परतें
झबलपुर
बरगी डैम में हुआ क्रूज हादसा सिर्फ एक त्रासदी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी का आईना है जो हर बार चेतावनी के बाद भी आंखें मूंद लेता है।
29 साल की एक मां अपने 4 साल के बेटे को सीने से चिपकाए मृत मिली,आख़िरी सांस तक बच्चे को बचाने की कोशिश में सिस्टम की बलि चढ़ गए। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील इंसान को झकझोरने के लिए काफी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सिस्टम को भी झकझोरेगा?
तथ्य डराने वाले हैं,टिकट सिर्फ 29 लोगों के थे, लेकिन सवारियां करीब 40 बैठी थी।
खराब मौसम की चेतावनी के बावजूद क्रूज रवाना।
सिर्फ एक ऑपरेटर और एक असिस्टेंट के भरोसे दर्जनों जानें।
और सबसे अहम लाइफ जैकेट तक समय पर और सही हालत में उपलब्ध नहीं।
यह हादसा नहीं, जिम्मेदारियों की सामूहिक हत्या है।
नियमों की अनदेखी, सुरक्षा से समझौता और निगरानी की पूरी विफलता—सब कुछ साफ नजर आता है।
लेकिन क्या होगा?
कुछ दिन सियासत, कुछ बयान, कुछ निलंबन… और फिर वही चुप्पी।
सच यही है यहां हादसे होते नहीं, होने दिए जाते हैं।
उस मां का आख़िरी आलिंगन सिर्फ एक भावुक तस्वीर नहीं,
बल्कि सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है।
सिस्टम से अब सवाल सीधा है
क्या इस बार जवाबदेही तय होगी,
या फिर एक और हादसा “फाइलों” में दफन कर दिया जाएगा?
