20 जुलाई को मनाया जाएगा मां ताप्ती जन्मोत्सव, 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना
प्रशासन को सुरक्षा, यातायात, विद्युत एवं भीड़ नियंत्रण की विशेष व्यवस्था करने की आवश्यकता
गगनदीप खेरे:
मुलताई। प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल सप्तमी के पावन अवसर पर मां ताप्ती का जन्मदिवस “मां ताप्ती जन्मोत्सव” के रूप में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। विगत कुछ वर्षों में इस आयोजन का स्वरूप लगातार भव्य होता गया है। जहां पहले कुछ हजार श्रद्धालु ही इस अवसर पर मुलताई पहुंचते थे, वहीं अब लाखों भक्त मां ताप्ती का आशीर्वाद प्राप्त करने यहां आने लगे हैं। मध्यप्रदेश शासन द्वारा भी ताप्ती जन्मोत्सव के महत्व को देखते हुए बैतूल जिले में कलेक्टर द्वारा इस दिन स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है।
इस वर्ष मां ताप्ती जन्मोत्सव 20 जुलाई, सोमवार को मनाया जाएगा। सोमवार का दिन होने के कारण आयोजन को अत्यंत शुभ माना जा रहा है और अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार दो लाख से अधिक श्रद्धालु मुलताई पहुंच सकते हैं। ऐसी स्थिति में प्रशासन को सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा, विद्युत एवं भीड़ प्रबंधन की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
जीर्ण-शीर्ण मंदिर को लेकर बरतनी होगी विशेष सावधानी
मां ताप्ती परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन ताप्ती मंदिर वर्तमान में अत्यधिक जर्जर अवस्था में है। सुरक्षा कारणों से मंदिर के पीछे के हिस्से में श्रद्धालुओं का प्रवेश लंबे समय से प्रतिबंधित है। ताप्ती जन्मोत्सव पर भी मंदिर के भीतर सीमित संख्या में ही लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा पूर्व वर्षों की तरह बाहर से ही दर्शन व्यवस्था संचालित की जानी चाहिए।
श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रवेश द्वार पर विशाल एलईडी स्क्रीन लगाई जानी चाहिए । जिससे परिक्रमा मार्ग से ही भक्त मा ताप्ती के दर्शन कर सकें। साथ ही मंदिर के सामने अनावश्यक भीड़ एकत्रित न होने देने के लिए विशेष प्रबंधन आवश्यक होगा।
वर्षा और विद्युत सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी
जुलाई माह में भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए आयोजन स्थल पर लगाए जाने वाले विद्युत पोल, लाइटिंग एवं अन्य उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। विद्युत करंट फैलने जैसी किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक होगा।
प्रशासन को अभी से विद्युत विभाग को संभावित भीड़ के बारे में अवगत कराकर निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही आपातकालीन स्थिति के लिए ताप्ती परिक्रमा मार्ग एवं मंदिर क्षेत्र में उच्च क्षमता के जनरेटर की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
पार्किंग, चिकित्सा एवं सफाई व्यवस्था भी महत्वपूर्ण
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूर्व वर्षों की तरह समीपस्थ स्थानों पर पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिससे बुजुर्गों एवं महिलाओं को अधिक दूरी पैदल न चलना पड़े। परिक्रमा मार्ग के निकट अस्थायी चिकित्सा शिविर एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था भी आवश्यक है।
नगर पालिका को पूरे दिन विशेष सफाई अभियान चलाकर स्वच्छता बनाए रखने के निर्देश दिए जाने चाहिए। वहीं प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय बनाकर प्रसाद वितरण एवं भंडारा व्यवस्था भी सुचारू रूप से संचालित की जानी चाहिए।
सुबह से देर रात तक होंते है धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन
पूर्व वर्ष में इस तरह हुए थे कार्यक्रम
मां ताप्ती जन्मोत्सव पर एक दिन पूर्व से ही ग्रामीण भजन मंडलियां मुलताई पहुंचना शुरू कर देती हैं और मंदिरों में भजन-कीर्तन का दौर प्रारंभ हो जाता है।
प्रमुख कार्यक्रम इस प्रकार हुए थे:
प्रातः 9 से 10 बजे: मां ताप्ती जन्मोत्सव समिति द्वारा ध्वज पूजन एवं ध्वजारोहण।
सुबह 10 बजे: राजा पवार एवं सहयोगियों द्वारा पंडित अशोक आचार्य के निर्देशन में मां ताप्ती का दुग्धाभिषेक।
सुबह 11 बजे: ताप्ती सेवा समिति द्वारा ताप्ती द्वार से चुनरी यात्रा का शुभारंभ।
दोपहर 12 बजे: चुनरी यात्रा पुनः ताप्ती द्वार पहुंचकर नाव के माध्यम से मां ताप्ती को चुनरी अर्पित करेगी।
दोपहर 12 बजे: पंडित सौरभ जोशी एवं राजू चौबे द्वारा किए जा रहे ताप्ती पुराण वाचन का समापन तथा मां ताप्ती जन्मोत्सव आरती।
दोपहर 1 बजे से: नगर पालिका द्वारा सामूहिक दुग्धाभिषेक कार्यक्रम, जिसमें हजारों श्रद्धालु पाइप लाइन के माध्यम से रात्रि तक मां ताप्ती का अभिषेक किया था।
दोपहर में : जगदीश मंदिर में पंडित संतोष शर्मा द्वारा ताप्ती पुराण वाचन का समापन।
दोपहर 3 बजे: बैतूल की सांस्कृतिक विरासत समिति द्वारा कामथ से लाई गई विशाल ध्वज यात्रा का ताप्ती मंदिर आगमन।
शाम 4 बजे: मां ताप्ती जन्मोत्सव समिति द्वारा विशाल झांकी एवं भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ।
शाम 7 बजे: ताप्ती सेवा समिति द्वारा मां ताप्ती की महाआरती।
राम मंदिर में ताप्ती जन्मोत्सव समिति द्वारा मा ताप्ती का पूजन एवं अभिषेक
रात्रि: नगर पालिका द्वारा आकर्षक आतिशबाजी एवं विभिन्न स्थानों पर प्रसाद वितरण।
शाम 6 से रात 9 बजे तक रहती है सबसे अधिक भीड़
पिछले वर्षों के अनुभव के अनुसार शाम 6 बजे से रात्रि 9 बजे के बीच ताप्ती परिक्रमा मार्ग एवं मंदिर क्षेत्र में सबसे अधिक भीड़ रहती है। ऐसे में प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल, स्वयंसेवकों एवं बैरिकेडिंग की व्यवस्था करनी होगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्रद्धा और सुरक्षा का संतुलन जरूरी
मां ताप्ती जन्मोत्सव मुलताई की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पहचान का सबसे बड़ा पर्व बन चुका है। इस वर्ष अनुमानित दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन, नगर पालिका, विद्युत विभाग, स्वास्थ्य विभाग तथा सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है, ताकि मां ताप्ती जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और सुव्यवस्थित आयोजन का एक नया उदाहरण प्रस्तुत कर सके।
